Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full

थोड़ी देर चढ़ाई के बाद एक समतल भूमि आती है। यहाँ तीसरी चैत्यवंदन की जाती है। यह विशेष है क्योंकि यहाँ हम सभी तीर्थंकरों को एक साथ नमन करते हैं।

कहानी के अनुसार, एक बार गुरु राजेंद्र सूरि ने यहाँ बैठकर 5 चैत्यवंदन का प्रवर्तन किया था। उन्होंने कहा:

"भाई! चाहे तुम अमीर हो या गरीब, पंडित हो या मूर्ख, यहाँ समभूमि पर सब एक समान हैं। जैसे यह ज़मीन समतल है, वैसे ही समता का भाव रखो।"

तीसरी वंदना में श्रद्धालु ध्यान करता है- "सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखूं। सबको सुखी देखूं।" palitana 5 chaityavandan in hindi full

उत्तम ठाणे ठियं वंदे, जिणं तं चरिमे त्ति संतं।
अहं करेमि वंदणं, तुहं साहु पसीद मे।।

हिंदी:
हे भगवन्! उत्तम स्थान (मोक्षस्थान) में स्थित, अंतिम शरीरधारी जिनेंद्र भगवान को मैं वंदन करता हूँ। हे साधो! आप मुझ पर प्रसन्न हों।


सामान्य चैत्यवंदन एक बार किया जाता है, लेकिन 5 चैत्यवंदन का अर्थ है—पालीताणा की पहाड़ी पर पाँच प्रमुख स्थानों (टेकरियों) पर जाकर विधिपूर्वक चैत्यवंदन करना। ये पाँच स्थान हैं: "भाई

गहन अध्ययन: कुछ आगमों के अनुसार, ये पाँच चैत्यवंदन पाँच कल्याणक (च्यवन, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान, मोक्ष) के प्रतीक हैं।

जैन शास्त्रों और तीर्थ वंदना ग्रंथों के अनुसार, पालीताना में पाँच चैत्यवंदन करने से:

कुछ ग्रंथों और मार्गदर्शक पुस्तिकाओं में पांचवीं वंदना के रूप में विमान के अलावा किसी अन्य विशिष्ट स्थान या प्राचीन वृक्ष (अश्वत्थ वृक्ष) के नीचे स्थित प्रतिमा का उल्लेख मिलता है। मोक्ष) के प्रतीक हैं।

(नोट: कुछ मार्गदर्शक पुस्तिकाओं में मंदिरों का क्रम या नाम थोड़ा भिन्न हो सकता है, लेकिन उपरोक्त पांच प्रमुख स्थानों का अधिकतर यात्री सेवन करते हैं।)


कहा जाता है कि एक बार एक साधारण व्यापारी पालीताणा आया। उसने 5 चैत्यवंदन करने की ठानी। पहले चार तो उसने कर लिए, लेकिन पाँचवाँ करते समय उसे बहुत थकान हुई। तब उसने मन ही मन कहा— “हे भगवान, मुझे बल दो।” तभी उसे आदिनाथ भगवान की वाणी सुनाई दी— “जो पाँच बार झुकता है, वह पाँचों जन्मों के बंधन से मुक्त हो जाता है।” उसने पाँचवाँ चैत्यवंदन पूरा किया और उसकी आत्मा को गहरी शांति मिली।